Whatsapp: +91 7669297140
Please Wait a Moment
Menu
Dashboard
Register Now
Hindi Inscript Exercise 99 & 100 ()
Font Size
+
-
Reset
Backspace:
0
Timer :
00:00
अध्यक्ष महोदय, आज जो किसान है, गन्ना पैदा करता है वह परेशान है कि क्या होगा। हमारा यह व्यापार रहेगा या नहीं रहेगा। उसका यह व्यापार चलेगा या नहीं चलेगा। एक तरफ तो यह कहा जाता है कि किसानों को गन्ने की ज्यादा क़ीमत मिले। हम किसानों की सहायता करना चाहते हैं और किसानों से हम यह आशा करते हैं कि वे अधिक पैदा करें। लेकिन दूसरी तरफ किसानों को जो मिलने वाली चीजें हैं उन पर नए कर लगाए जाते हैं। केवल केंद्र सरकार ही नहीं, बल्कि राज्य सरकारें भी कर लगाती रहती हैं। अधिक उपज के लिए किसानों को कुछ चीजों की आवश्यकता है जिनकी पूर्ति करना बहुत आवश्यक है। उनको ऐसे साधन चाहिए जिनको वे खेती में उपयोग कर सके। हमारे प्रदेश में बड़े-बड़े बाँध बने हैं और उनसे बिजली पैदा होती है। लेकिन बिजली घर का कहीं पता नहीं है। बिजली घर यदि बना भी हुआ है तो भी उनको बिजली नहीं मिलती है। नलकूप पड़े हैं, लेकिन चालू नहीं किए जा रहे हैं। जहाँ पर बिजली पहुँची भी है वहाँ के जो किसान हैं वे भी दर-दर की ठोकरें खाते फिरते हैं लेकिन उनको बिजली नहीं मिलती है। बेचारे किसी तरह से कर्ज लेकर डीजल पंप खरीदते हैं और उससे वे काम चला रहे हैं। लेकिन अब सरकार ने डीजल तेल पर भी कर बढ़ा दिया है। इसका नतीजा यह होगा कि उनके पंप पड़े रह जाएँगे। फिर आपको कहाँ से अन्न मिलेगा? आप किसान से यह आशा करते हैं कि वह अधिक अन्न पैदा करके आपको दे। उपज बढ़ावे लेकिन जो साधन हैं उन पर आप कर लगाते जा रहे हैं। किसान पर आप इतना बोझ डालते जा रहे हैं कि उनके प्रयोग को ही वह भूल जाएगा। खाद की भी बात की जाती है। आप कारखाने भी खोलना चाहते हैं दुनिया के जो बड़े-बड़े देश हैं उनको आप निवेदन कर रहे हैं कि यहाँ आकर वे खाद के कारखाने खोलें और खाद पैदा करें। क्या खाद आप इसलिए पैदा करना चाहते हैं कि किसान उसको ले जाए और उसकी फसल भस्म हो जाए? कारण यह है कि उसको समय पर पानी तो मिलेगा नहीं। अगर पानी नहीं मिलेगा तो खाद किस काम आएगा? इसलिए आवश्यकता इस बात की है कि उसे पहले पानी दिया जाए। अध्यक्ष महोदय, मैं आज एक ऐसे विषय पर बोलने जा रहा हूँ जो देश के सामने एक बहुत बड़ी समस्या बना हुआ है। आजकल कृषि पर बहस चल रही है, मैं कल से सुन रहा हूँ। कई लोगों ने तो सरकार की बड़ी प्रशंसा की है कि वह बहुत ही अच्छा काम कर रही है। मैं मंत्री महोदय से एक प्रश्न करना चाहता हूँ। मार्च में मंत्री महोदय ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा था कि दो वर्ष में हमारा देश आत्मनिर्भर हो जाएगा। मैं जानना चाहता हूँ कि ऐसा कहने के पीछे उनका आधार क्या है? कौन-से उनके पास ऐसे प्रमाण हैं जिनके आधार पर उन्होंने इस प्रकार की घोषणा की है? मैं चाहता हूँ कि जब वह उत्तर दें तो इस बात को अपने उत्तर में बताएँ। आप जानते हैं कि इस देश में 80 प्रतिशत लोग खेती करते हैं और उसके बाद भी आज हमारे देश का सम्मान दूसरे देशों में कितना है? आज हम दूसरे देशों से देश के नागरिकों के लिए खाद्यन्नों का आयात काफी मात्रा में कर रहे हैं। खाद्यान्न की स्थिति बिल्कुल संतोषजनक नहीं है। देश में जहाँ लोग 80 प्रतिशत खेती करते हैं, हम भोजन के मामले में भी आत्मनिर्भर नहीं हुए हैं। इसके कुछ कारण हैं। जिस समय देश स्वतंत्र हुआ उसी समय से इस सरकार ने कुछ गलतियाँ की हैं जिसका यह परिणाम है कि आज इतने वर्षों के बाद भी हम आत्मनिर्भर नहीं हो सके हैं। उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि अपने देश में पहला स्थान खेती को न देकर उद्योग को दिया गया है। उद्योग हमारे देश के लोगों की जीविका का मुख्य साधन नहीं हो सकता है। भोजन की समस्या के हल के लिए किन-किन चीजों की आवश्यकता है उसकी तरफ हमें ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले पानी की आवश्यकता है। मैं समझता हूँ कि देश में सिंचाई पर काफी जोर दिया जाना चाहिए और सिंचाई तथा खाद्यमंत्री एक होना चाहिए। यह मेरी माँग है। पानी के बाद खेती के लिए खाद भी आवश्यक है। खाद का स्थान दूसरा हो सकता है। आज देश में खाद की बात काफी जोर देकर कही जाती है। यह कहा जाता है कि उपज को बढ़ाने के लिए खाद की आवश्यकता है, बिना खाद के उपज नहीं बढ़ सकती। किंतु खाद कहाँ तक उपज को बढ़ा सकेगी यह भी देखने और सोचने की ही बात है। इस ओर एक समन्वयक नीति चाहिए।
Submit
Submit Test !
×
Dow you want to submit your test now ?
Submit